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एमएसएमई अग्रिमों का पुनर्गठन

पुनर्गठन की परिभाषा

जहां बैंक किसी भी खाते में उधारकर्ता की वित्तीय समस्याओं (वाणिज्यिक/ प्रतिस्पर्धी आधार के अलावा) से संबंधित आर्थिक या कानूनी कारणों के कारण किसी भी खाते में रियायत/ राहत देता है, तब खाते को पुनर्गठित खाता माना जाएगा।

पुनर्गठन में सामानव्यतः अग्रिमों /प्रतिभूतियों की शर्तों का संशोधन शामिल होगा, जिसमें सामान्यत: निम्नलिखित शामिल होंगे:

  1. पुनर्भुगतान अवधि का पुनर्निर्धारण
  2. किश्तों की राशि में परिवर्तन।
  3. वाणिज्यिक परिचालन (डीसीसीओ) शुरू होने की तारीख में बदलाव / स्थगन
  4. ब्याज दर में कमी।

 

25 करोड़ तक के एमएसएमई ऋण के लिए एक बारगी पुनर्गठन दिशानिर्देश

भारतीय रिज़र्व बैंक की अधिसूचना के अनुसार आस्ति वर्गीकरण में गिरावट के बिना 'मानक' रूप में वर्गीकृत एमएसएमई हेतु मौजूदा ऋणों के एकबारगी पुनर्गठन को अनुमत किया गया है, जो निम्नलिखित शर्तों के अधीन है:

  1. दिनांक 1 मार्च, 2020 को उधारकर्ता को बैंकों और एनबीएफसी का, गैर-निधि आधारित सुविधाओं सहित, कुल विगोपन रु.25 करोड़ से अधिक नहीं है।
  2. दिनांक 1 मार्च, 2020 को उधारकर्ता का खाता एक 'मानक आस्ति' था।
  3. दिनांक 31 मार्च, 2021 तक उधारकर्ता खाते का पुनर्गठन कार्यान्वित किया गया है।
  4. उधारकर्ता इकाई पुनर्गठन के कार्यान्वयन की तिथि पर जीएसटी पंजीकृत है। हालाँकि, यह शर्त उन एमएसएमई पर लागू नहीं होगी जिन्हे जीएसटी-पंजीकरण से छूट प्राप्त है। यह दिनांक 1 मार्च, 2020 को प्राप्त छूट की सीमा के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।
  5. मानक के रूप में वर्गीकृत उधारकर्ताओं के आस्ति वर्गीकरण को मानक के रूप में बनाए रखा जा सकता है, जबकि 2 मार्च, 2020 और कार्यान्वयन की तारीख के बीच एनपीए की श्रेणी में आने वाले खातों को 'मानक आस्ति' के रूप में कोटिउन्नयन किया जा सकता है, जैसा कि पुनर्गठन योजना के कार्यान्वयन के दिनांक को है। आस्ति वर्गीकरण का लाभ केवल तभी उपलब्ध होगा जब पुनर्गठन दिशानिर्देशों के अनुसार पुनर्गठन किया जाएगा।
  6. पुनर्गठन को कार्यान्वित किया गया माना जाएगा यदि सभी संबंधित दस्तावेज, जिसमें ऋणदाताओं और उधारकर्ता के बीच आवश्यक समझौतों का निष्पादन /प्रतिभूति प्रभार का सृजन /प्रतिभूतियों की पूर्णता शामिल है, का कार्य बैंक द्वारा पूर्ण किया गया है और नई पूंजी संरचना और /या वर्तमान ऋणों के नियमों और शर्तों में परिवर्तन को सभी उधारदाताओं और उधारकर्ता की बहियों में विधिवत रूप से परिलक्षित किया गया हो।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: पुनर्गठन के लिए कौन पात्र हैं ?

A:

  • सभी एमएसएमई उधारकर्ता जिनके पास दिनांक 01.03.2020 को गैर-निधिक सुविधाओं सहित रु.25 करोड़ तक का समग्र विगोपन (बैंकों और नबीएफसी से) है, जिसमें संघीय या बहुविध बैंकिंग व्यवस्था (एमबीए) शामिल हैं, वे पात्र हैं।
  • दिनांक 01.03.2020 को “मानक” श्रेणी में वर्गीकृत खाते पात्र हैं।
  • जो खाते दिनांक 01.03.2020 को "मानक" श्रेणी के अंतर्गत थे, परंतु दिनांक 02.03.2020 और पुनर्गठन के कार्यान्वयन की तारीख के बीच एनपीए श्रेणी में आ गए हैं उनका पुनर्गठन व कोटीउन्नयन किया जा सकता है।
  • यदि वित्तीय व्यवहार्यता स्थापित होती है और पुनर्गठन पैकेज की शर्तों के अनुसार उधारकर्ता से पुनर्भुगतान की एक उचित निश्चितता प्राप्त होती है तो खाता पुनर्गठन हेतु लिया जाएगा।
  • धोखाधड़ी और दुराचार में लिप्त उधारकर्ता पुनर्गठन के लिए अपात्र होंगे
  • इरादतन चूककर्ता पुनर्गठन के पात्र नहीं होंगे।

पुनर्गठन होने पर, खाते की आईआरएसी स्थिति "मानक" बनी रहेगी।

रु.25.00 करोड़ से अधिक के विगोपन वाले ऋण खातों के पुनर्गठन का अभिशासन कोविड 19 के लिए समाधान की रुपरेखा पर भारतीय रिज़र्व बैंक के दिनांक 06.08.2020 और 07.09.2020 के दिशानिर्देशों द्वारा किया जाएगा।

 

Q: पुनर्गठन का कार्यान्वयन कब तक किया जा सकता है

A: दिनांक 31.03.2021 तक उधारकर्ता खाते का पुनर्गठन लागू किया जाना चाहिए।

 

Q: पुनर्गठन क्या है ?

A: जहां बैंक किसी भी खाते में उधारकर्ता की वित्तीय समस्याओं (वाणिज्यिक / प्रतिस्पर्धी आधार के अलावा) से संबंधित आर्थिक या कानूनी कारणों के कारण किसी भी खाते में रियायत / राहत देता है, तब खाते को पुनर्गठित खाता माना जाएगा।

पुनर्गठन में आम तौर पर अग्रिमों / प्रतिभूतियों की शर्तों का संशोधन शामिल होगा, जिसमें सामान्यत: शामिल होंगे:

  1. क) पुनर्भुगतान अवधि का पुनर्निर्धारण
  2. ख) किश्तों की राशि में परिवर्तन।
  3. ग) वाणिज्यिक परिचालन (डीसीसीओ) में बदलाव / स्थगन
  4. घ) ब्याज दर में कमी।

 

Q: क्या जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य है?

A: पुनर्गठन कार्यान्वयन की तिथि पर उधारकर्ता इकाई जीएसटी पंजीकृत होनी चाहिए। हालांकि, यह शर्त उन एमएसएमई पर लागू नहीं होगी जो जीएसटी - पंजीकरण से छूट प्राप्त कर रहे हैं।

 

Q: पुनर्गठित ऋण के लिए अधिकतम पुनर्भुगतान अवधि क्या है ?

A: पुनर्गठन के कार्यान्वयन की तारीख से 10 वर्ष (अधिस्थगन अवधि सहित)

 

Q: क्या अतिरिक्त वित्त पर विचार किया जा सकता है ?

A: जी हां, सावधि ऋण या कार्यशील पूंजी के माध्यम से प्रस्ताव के गुण-दोष और मामला दर मामला आधार पर आवश्यकता आधारित अतिरिक्त वित्त पर विचार किया जा सकता है।.

 

 

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