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ऋण व्यवस्था

बैंक ऑफ महाराष्ट्र अपने ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझता है। परिचालनगत लचीलेपन के लिए अपने ग्राहकों की आवश्यकताओं पर विचार करते हुए, बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने ऋण व्यवस्था की एक नई योजना का शुभारंभ किया है ताकि केवल किसी विशेष सुविधा के अंतर्गत उपलब्ध अधिकतम सीमा के अधीन निधियों के इस्तेमाल को सीमित करने वाली प्रचलित प्रणाली की तुलना में अपनी आवश्यकताओं के अनुसार आसानी से मंजूर विभिन्न कार्यशील पूंजी सुविधाओं के बीच स्विच ओवर करने में ग्राहक सक्षम बन सकें।  यह प्रणाली अनिवार्य रूप से मंजूर ऋण व्यवस्था सुविधा के अंतर्गत उनकी ऋण आवश्यकताओं के कुशल प्रबंधन में अनिवार्य रूप से मध्यम/ बड़ी व्यावसायिक इकाइयों को सुविधा प्रदान करेगी। ​

 

ऋण व्यवस्था के अंतर्गत, डीए एलसी सुविधाओं और नकदी ऋण (स्टॉक/ बही-ऋण) के लिए अलग सीमा पर विचार करने/ मंजूरी प्रदान करने के स्थान पर, डीए-एलसी सुविधाओं हेतु उप सीमा के साथ नकदी ऋण (स्टॉक एवं बही-ऋण) - सह- डीए एलसी सीमा के लिए एक संयुक्त सीमा को मंजूरी प्रदान की जाती है। एक उत्पाद के रूप में ऋण व्यवस्था बैंकिंग उद्योग में एक अभिनव एवं अद्वितीय पहल है।  

 

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